***आम  की टोकरी ***

यह कविता रिमझिम हिंदी की पाठ्य पुस्तक कक्षा पहली की हैं | यह कविता राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसन्धान और प्रशिक्षण परिषद (नेशनल काउन्सिल ऑफ एड्युकेशनल रिसर्च एण्ड ट्रेनिंग) द्वारा प्रकाशित पहली  कक्षा में 2006 

से पढ़ी जा रही हैं | यह कविता रामकृष्ण शर्मा खद्दर द्वारा लिखी गयी है | 



                                                    


छह साल की छोकरी,

भरकर लाई टोकरी।


                                टोकरी में आम हैं,

                                नहीं बताती दाम है।


दिखा-दिखाकर टोकरी,

हमें बुलाती छोकरी।


                                हम को देती आम है,

                                नहीं बुलाती नाम है।


नाम नहीं अब पूछना,

हमें आम है चूसना।

                                

                                                            ***धन्यवाद ***



                         कुछ नयी जानकारी| 

**कक्षा पहली  में पढ़ाई जाने वाली राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसन्धान और प्रशिक्षण परिषद (नेशनल काउन्सिल ऑफ एड्युकेशनल रिसर्च एण्ड ट्रेनिंग)  की किताब रिमझिम-1 की एक कविता सोशल मीडिया पर ट्रेंड हो रही है। इस कविता का शीर्षक ‘आम की टोकरी’ है। वैसे तो कविता के शीर्षक में कोई समस्या नहीं है। लेकिन कविता की भाषा को पढ़कर कुछ लोगों का कहना है कि यह डबल मीनिंग दे रही है, इसलिए इसे पाठ्यक्रम से हटा देना चाहिए। कक्षा 1 के छात्रों के लिए निर्धारित हिंदी पाठ्यपुस्तक रिमझिम की कविता में छोकरी  शब्द को शामिल करने के पीछे का कारण स्पष्ट करने के लिए आधिकारिक बयान जारी किया। कई सोशल मीडिया यूजर्स ने बच्चों की कविता आम की टोकरी  की व्यापक आलोचना की, जिसमें टोकरी  शब्द (एक गैर-अपमानजनक खिचड़ी शब्द) का इस्तेमाल छह साल की एक लड़की का जिक्र करने के लिए किया गया है, जो उन्हें बेचने के लिए अपने सिर पर आम की टोकरी ले जाते हुए नजर आ रही है ।

                                                                    उन्होंने इस शब्द को आक्रामक माना और इसे बदलने का सुझाव दिया । हालांकि, कुछ नेटीजन ने बताया कि कुछ स्थानीय बोलियों में छोकरी  भाषा आम है और इसे अपमानजनक नहीं माना जाता है ।**




|||||||||| हमें  आशा हैं की ये कविता आपकी बचपन की यादें ताजा की  होगी | और जो पहली बार पढ़े होंगे उनको मजेदार लगी होंगी |||||||